अमेरिकी विदेश विभाग
प्रवक्ता का कार्यालय
फरवरी 19, 2021

20 जनवरी को, पदभार संभालने के पहले ही दिन राष्ट्रपति बाइडेन ने अमेरिका को पेरिस समझौते में वापस लाने के लिए क़ानूनी दस्तावेज़ पर हस्ताक्षर किए थे। समझौते के प्रावधानों के अनुसार, अमेरिका आधिकारिक तौर पर आज फिर से समझौते में एक पक्ष बन गया है।

पेरिस समझौता वैश्विक स्तर पर कार्रवाई करने का एक अभूतपूर्व ढांचा है। हमें ये पता है क्योंकि हमने इसे तैयार करने और वास्तविकता बनाने में मदद की थी। इसका उद्देश्य सरल और व्यापक दोनों है: हम सभी को धरती के गर्म होने की आपदा से बचने में मदद करना और जलवायु परिवर्तन के पहले से दिख रहे प्रभावों के खिलाफ़ दुनिया भर में क्षमताओं का विकास करना।

हमारे लिए 2016 में समझौते में शामिल होना महत्वपूर्ण था – आज उसमें दोबारा शामिल होना भी उतना ही महत्वपूर्ण है – और अब आने वाले सप्ताहों, महीनों और वर्षों में हम जो करेंगे उसका और भी महत्व है।

आपने देखा है और आगे भी देखेंगे कि हम सभी स्तरों पर अपने सर्वाधिक महत्वपूर्ण द्विपक्षीय और बहुपक्षीय वार्ताओं में जलवायु परिवर्तन को शामिल करते रहेंगे। इन वार्ताओं में हम अन्य नेताओं से पूछते हैं: हम सब मिलकर और अधिक प्रयास कैसे कर सकते हैं?

जलवायु परिवर्तन और विज्ञान कूटनीति अब दोबारा कभी भी हमारी विदेश नीति चर्चाओं में महज “अतिरिक्त” मुद्दे नहीं हो सकते। जलवायु परिवर्तन के वास्तविक ख़तरों से निपटना और हमारे वैज्ञानिकों की सलाह को सुनना, अब हमारी घरेलू और विदेश नीति प्राथमिकताओं के केंद्र में है। यह विषय राष्ट्रीय सुरक्षा, प्रवासन, अंतरराष्ट्रीय स्वास्थ्य प्रयासों, तथा आर्थिक कूटनीति एवं व्यापार वार्ताओं में हमारी चर्चा का महत्वपूर्ण घटक है।

हम सभी मोर्चों पर दुनिया से दोबारा सहभागिता कर रहे हैं, जिसमें 22 अप्रैल का राष्ट्रपति द्वारा आयोजित लीडर्स क्लाइमेट समिट शामिल है। और आगे, हम COP26 जलवायु सम्मेलन को सफल बनाने के लिए ब्रिटेन और दुनिया भर के अन्य देशों के साथ काम करने के लिए तत्पर हैं।


मूल स्रोत: https://www.state.gov/the-united-states-officially-rejoins-the-paris-agreement/

अस्वीकरण: यह अनुवाद शिष्टाचार के रूप में प्रदान किया गया है और केवल मूल अंग्रेज़ी स्रोत को ही आधिकारिक माना जाना चाहिए।

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The Lessons of 1989: Freedom and Our Future