अमेरिकी विदेश विभाग
प्रवक्ता का कार्यालय
संबोधन
जनवरी 21, 2022

इंटरकॉन्टिनेंटल होटल
जेनेवा, स्विटज़रलैंड

विदेश मंत्री ब्लिंकन:  नमस्कार। विदेश मंत्री लावरोव और मैंने कुछ देर पहले अपनी बैठक समाप्त की है, और मैं सबसे पहले स्विट्ज़रलैंड को हमारी मेज़बानी के लिए, पारंपरिक आतिथ्य के लिए, धन्यवाद देना चाहता हूं, सराहना करता हूं।

मैं अमेरिका-रूस सामरिक स्थिरता वार्ता, नैटो-रूस परिषद, और ओएससीई में यूक्रेन संकट और व्यापक यूरोपीय सुरक्षा मुद्दों पर पिछले सप्ताह की चर्चाओं पर आगे की बातचीत के लिए जेनेवा आया था। हमारा उद्देश्य यह सुनिश्चित करना था कि क्या रूस यूक्रेन के मामले में तनाव घटाने के लिए कूटनीतिक मार्ग अपनाने और अन्य आवश्यक क़दम उठाने और अंततः कूटनीति और बातचीत के सहारे हमारे मतभेदों को हल करने के लिए तैयार है।

विदेश मंत्री लावरोव के साथ आज की चर्चा स्पष्ट और सारगर्भित थी। मैंने उन्हें अमेरिका और हमारे यूरोपीय सहयोगियों और साझेदारों की स्थिति से अवगत कराया कि हम यूक्रेन की संप्रभुता और क्षेत्रीय अखंडता के समर्थन में मज़बूती से खड़े हैं। हमारा स्पष्ट रुख है: यदि कोई रूसी सैन्य बल यूक्रेन की सीमा के भीतर जाता है, तो यह नए सिरे से आक्रमण माना जाएगा। अमेरिका तथा हमारे साझेदार और सहयोगी इसका त्वरित, गंभीर और एकजुट जवाब देंगे।

हमारा ये भी अनुभव रहा है कि रूस आक्रमण के कई तरह के हथकंडे अपनाता है जोकि पूर्ण सैन्य कार्रवाई से कम होते हैं, इनमें साइबर हमले, अर्धसैनिकों का उपयोग और खुली सैन्य कार्रवाई से बचते हुए अपने हितों को आक्रामक रूप से आगे बढ़ाने के अन्य उपाय शामिल हैं। इस प्रकार की रूसी आक्रामकता का भी निर्णायक, संतुलित और एकजुट जवाब दिया जाएगा।

यूक्रेन में बुधवार को राष्ट्रपति ज़ेलेंस्की और विदेश मंत्री कुलेबा के साथ; कल जर्मनी में जर्मनी, ब्रिटेन, फ्रांस और यूरोपीय संघ के मेरे समकक्षों के साथ; और जर्मन चांसलर शॉल्त्स के साथ मेरी बैठकों का भी यही स्पष्ट संदेश है। हम कूटनीति और बातचीत के सहारे आगे बढ़ने की अपनी प्रतिबद्धता को लेकर एकजुट हैं, लेकिन साथ ही हमारी एकजुटता टकराव और संघर्ष का रास्ता चुनने की स्थिति में रूस पर भारी क़ीमत थोपने के हमारे संकल्प को लेकर भी है।

मैंने विदेश मंत्री लावरोव से एक बार फिर कहा कि अमेरिका तथा हमारे यूरोपीय सहयोगी और साझेदार हाल के सप्ताहों में रूस द्वारा उठाई गई सुरक्षा चिंताओं को दूर करने के लिए पारस्परिकता की भावना से काम करने को तैयार हैं, यानि सीधे शब्दों में कहें तो, रूस को भी हमारी चिंताओं का समाधान करना चाहिए। ऐसे कई क़दम हैं जो रूस समेत हम सभी उठा सकते हैं — पारदर्शिता बढ़ाने, जोखिम कम करने, हथियार नियंत्रण के उपायों का विस्तार करने, और परस्पर विश्वास बढ़ाने के लिए।

मैंने रूस की कार्रवाइयों पर अपनी विशिष्ट चिंताओं के बारे में बेबाकी से विदेश मंत्री लावरोव को अवगत कराया, जो न केवल यूक्रेन में बल्कि पूरे यूरोप में और वास्तव में, दुनिया भर में शांति और सुरक्षा के लिए चुनौती खड़ा करते हैं या उन्हें कमज़ोर करते हैं। मैंने तनाव घटाने और सुरक्षा बढ़ाने हेतु कई विचार भी सामने रखे, जिन्हें हमने अपने साझेदारों और सहयोगियों के परामर्श से विकसित किया है और जिनको लेकर हमें विश्वास है कि हम पारस्परिकता के सिद्धांत के अनुरूप फिर से साझा धरातल पा सकते हैं।

यह कोई वार्ता नहीं थी बल्कि चिंताओं और विचारों का स्पष्ट आदान-प्रदान था। मैंने विदेश मंत्री लावरोव को स्पष्ट कर दिया कि कुछ ऐसे मुद्दे और बुनियादी सिद्धांत हैं जिनकी रक्षा के लिए अमेरिका तथा हमारे साझेदार और सहयोगी प्रतिबद्ध हैं। इनमें ऐसे मुद्दे भी शामिल हैं जो यूक्रेनी लोगों के अपना भविष्य चुनने के संप्रभु अधिकार में रुकावट बन सकते हैं। इन पर बातचीत की गुंजाइश नहीं है – बिल्कुल नहीं।

विदेश मंत्री लावरोव और मैंने आगे के रास्ते के बारे में भी बात की। मैं ये भी बता दूं कि उन्होंने हमसे और मुझसे सुना है कि हमारे लिए अनुल्लंघनीय सिद्धांत क्या है: यूक्रेन के बिना यूक्रेन के बारे में कुछ भी नहीं, नैटो के बिना नैटो के बारे में कुछ भी नहीं, यूरोप के बिना यूरोप के बारे में कुछ भी नहीं। हमारी चर्चा के आधार पर, मेरा मानना ​​है कि हम आपसी सुरक्षा सुनिश्चित करने वाली सहमतियां विकसित करने की इस प्रक्रिया को आगे बढ़ा सकते हैं, लेकिन यह रूस के यूक्रेन के प्रति अपनी आक्रामकता रोकने पर निर्भर करता है।

तो अब रूस के सामने यही विकल्प है। या तो वह शांति और सुरक्षा की दिशा में जाने वाला कूटनीतिक रास्ता चुने, या फिर वो रास्ता जो केवल संघर्ष, गंभीर परिणामों और अंतरराष्ट्रीय निंदा की दिशा में जाता है। अमेरिका तथा यूरोप में हमारे सहयोगी और साझेदार इन दोनों ही रास्तों पर रूस का सामना करने के लिए तैयार हैं, और हम निरंतर यूक्रेन के साथ खड़े रहेंगे।

मेरा मानना ​​है कि विदेश मंत्री लावरोव को अब हमारी स्थिति और उसके उलट परिदृश्य की बेहतर समझ है। आज की चर्चा इस मायने में उपयोगी थी, और ठीक इसी वजह से हम मिले थे।

इसलिए मैं राष्ट्रपति बाइडेन और हमारी पूरी राष्ट्रीय सुरक्षा टीम के साथ-साथ अमेरिकी संसद के सदस्यों, और अहम रूप से आने वाले दिनों में अपने सहयोगियों से, परामर्श करने के लिए आज दोपहर वाशिंगटन लौटूंगा। आज की चर्चा के आधार पर, विदेश मंत्री लावरोव और मैं इस बात पर सहमत हुए कि कूटनीतिक प्रक्रिया को जारी रखना महत्वपूर्ण है। मैंने उनसे कहा कि आने वाले दिनों में सहयोगियों और साझेदारों के साथ विचार-विमर्श करने के बाद हम आशा करते हैं कि हम रूस के साथ अपनी चिंताओं और विचारों को और अधिक विस्तार से और अगले सप्ताह लिखित रूप में साझा करने में सक्षम होंगे। और हम उसके बाद आगे और चर्चा के लिए सहमत हुए। हम इस बात पर भी सहमत थे कि आगे भी कूटनीतिक चर्चा करना आगे बढ़ने का बेहतर तरीक़ा होगा, लेकिन फिर से कहना चाहूंगा कि ये वास्तव में रूस पर निर्भर करता है कि वह किस रास्ते पर चलना चाहेगा।

मैं इस बात का भी उल्लेख करना चाहूंगा कि रूसी विदेश मंत्री और मुझे ईरान पर चर्चा करने का भी अवसर मिला, जो इस बात का उदाहरण है कि अमेरिका और रूस साझा चिंता के सुरक्षा मुद्दों पर एक साथ कैसे काम कर सकते हैं। फिर से जेसीपीओए समझौते के परस्पर अनुपालन के मुद्दे पर ईरान के साथ बातचीत एक निर्णायक मोड़ पर आ चुकी है। यदि अगले कुछ हफ़्तों में कोई समझौता नहीं होता है, तो परमाणु कार्यक्रम को लेकर ईरान की निरंतर प्रगति जेसीपीओए में वापसी को असंभव बना देगी।

लेकिन अभी, उन वार्ताओं को एक सफल निष्कर्ष पर लाने और सभी पक्षों की शेष चिंताओं को दूर करने के लिए थोड़ा-सा वक़्त मौजूद है। हमें आज किसी बड़ी सफलता की उम्मीद नहीं थी, लेकिन मेरा मानना है कि अब हम एक-दूसरे की चिंताओं को, एक-दूसरे की स्थिति को स्पष्टता से समझ पा रहे हैं। देखते हैं आगे क्या होता है।

और इसके साथ ही, मुझे आपके सवालों का जवाब देकर खुशी होगी।

श्री प्राइस: एंद्रिया मिचेल।

प्रश्न:  शुक्रिया। धन्यवाद, विदेश मंत्री जी। श्री लावरोव ने आज उन्मादी बयानबाज़ी का ज़िक्र किया, उन्हीं के शब्दों में, यूक्रेन को भड़काने के लिए आक्रमण के बारे में पश्चिमी देशों की उन्मादी बयानबाज़ी। और राष्ट्रपति बाइडेन का कहना है कि अब तक के घटनाक्रम को देखते हुए पुतिन आक्रमण की दिशा में बढ़ेंगे क्योंकि उन्हें कुछ करना है।

तो क्या आपको लगता है कि आज की स्थिति में, आप श्री लावरोव के ज़रिए बेहतर समझ सके हैं, सबसे पहले ये कि पुतिन के इरादे क्या हैं? क्या आपसे उस आक्रमण को रोकने के बारे में कोई प्रतिबद्धता जताई गई है, जिसे कि आप किसी सकारात्मक समझौते की राह का अवरोध मानते हैं?

उन्होंने कहा है कि आप लिखित प्रतिक्रियाएं पेश करने जा रहे हैं, जिसकी आपने अभी पुष्टि की है, लेकिन वह चाहते हैं कि वो उनके मूल प्रस्तावों पर हों, जिन पर आपने और प्रशासन में हर किसी ने शुरू से ही असहमति जताई है, यानि नैटो को सीमित करने का प्रस्ताव। तो क्या नैटो के विस्तार को लेकर आपके लिखित उत्तरों में कोई अलग प्रतिक्रिया होगी, जिसके बारे में आपने अभी-अभी कहा था कि ऐसा कुछ भी नहीं है, इस मुद्दे पर बात नहीं हो सकती? तो आप इस संकट को कम करने के लिए किसी भी तरह की सहमति का क्या आधार पाते हैं?

और चूंकि आपने ईरान की बात की है, तो क्या आपको लगता है कि श्री लावरोव से बात करने के बाद, इस बात की संभावना है कि आप और रूस – अमेरिका और रूस – और अन्य सहयोगी देश ईरान को राज़ी कर सकते हैं, उसे समझौते के अनुपालन के लिए सहमत कर सकते हैं? और क्या उसके बाद अमेरिका शायद उसी के साथ प्रतिबंध हटाने के लिए भी सहमत हो जाएगा? आपका बहुत बहुत धन्यवाद।

विदेश मंत्री ब्लिंकन:  बहुत बहुत धन्यवाद, एंद्रिया। सबसे पहले, हम भावनाओं के आधार पर आगे नहीं बढ़ रहे हैं। हम तथ्य और इतिहास के आधार पर आगे बढ़ रहे हैं। तथ्य ये है कि रूस ने यूक्रेन की सीमा पर भारी संख्या में सैन्य बलों को जमा किया है और ऐसा करना जारी रख रहा है – हाल का आंकड़ा 100,000 सैनिकों का है। इसमें बेलारूस में तैनात रूसी बल शामिल हैं जो यदि राष्ट्रपति पुतिन ने चाहा, तो रूस को यूक्रेन पर दक्षिण से, पूर्व से, और उत्तर से हमला करने की क्षमता देते हैं। और हमने यूक्रेन को अस्थिर करने की, सरकार को गिराने की, और अन्य अस्थिरकारी कार्रवाइयों की योजनाएं देखी हैं, जिनमें से कुछ में सैन्य बल के अतिप्रयोग से बचने की बात है।

तो, जैसा कि मैंने कहा, यह कोई भावनात्मक आधार वाली बात नहीं है। इसके पीछे तथ्य और साथ ही ऐतिहासिक आधार हैं। रूस ने 2014 में यूक्रेन पर हमला किया, क्रीमिया पर क़ब्ज़ा कर लिया, पूर्वी यूक्रेन के डोनबास में अब भी जारी संघर्ष को भड़काया, यूक्रेन की सीमाओं को बलपूर्वक बदला। हम ये सब ही देख रहे हैं। हमने रूसी अधिकारियों को यह कहते सुना है कि उनका यूक्रेन पर आक्रमण करने का कोई इरादा नहीं है। वास्‍तव में, विदेश मंत्री लावरोव ने आज मेरे सामने इसी बात को दोहराया। लेकिन जो सभी को सामने दिखाई दे रहा है हम उस पर विचार कर रहे हैं, जोकि उनकी कार्रवाइयां हैं, इसलिए शब्दों से कोई फ़र्क़ नहीं पड़ता। मैंने विदेश मंत्री लावरोव को सुझाव दिया, जैसा कि हमने बार-बार किया है, कि यदि रूस दुनिया को यह यक़ीन दिलाना चाहता है कि उसका यूक्रेन पर आक्रमण का कोई इरादा नहीं है, तो इसके लिए शुरुआत का बहुत अच्छा तरीक़ा है तनाव को कम करना, यूक्रेन की सीमाओं से अपने सैनिकों को पीछे हटाना, साथ ही साथ कूटनीति और बातचीत में शामिल होना, जो हमने आज किया और हमारी योजना आने वाले दिनों और सप्ताहों में भी इसे जारी रखने की है।

हमने हमेशा कहा है कि हमारा इरादा न केवल रूस द्वारा व्यक्त चिंताओं पर जवाब देने का है, बल्कि हम अपनी खुद की चिंताओं को भी साझा करना चाहते हैं, जो कई हैं, रूस द्वारा की जाने वाली कार्रवाइयों के बारे में जिन्हें हम यूरोप में, और वास्तव में इससे आगे भी, सुरक्षा के लिए ख़तरे के रूप में देखते हैं। और इसलिए, एंद्रिया, आज हमारे बीच हुई बातचीत, साथ ही पिछले सप्ताह अमेरिका और रूस के बीच सामरिक स्थिरता वार्ता, नैटो-रूस परिषद, और ओएससीई की बैठकों में हुई बातचीत भी, ये सुनिश्चित करने के लिए महत्वपूर्ण थी कि हम एक-दूसरे की स्थितियों को, एक-दूसरे की चिंताओं को पूरी तरह समझ सकें।

उन वार्ताओं तथा सहयोगियों और साझेदारों के साथ गहन परामर्श के बाद, पिछले सप्ताह की वार्ताओं पर हमारे विचार करने के बाद – और संभवतः रूसियों द्वारा हमारी बातों पर राष्ट्रपति पुतिन के साथ चर्चा के बाद – राष्ट्रपति बाइडेन चाहते थे कि मैं इस वार्ता में भाग लूं, सीधे विदेश मंत्री लावरोव से इस बात पर चर्चा के लिए वर्तमान में दोनों पक्षों की क्या स्थिति है, इस संभावना को तलाशने के लिए कि क्या आगे बातचीत और कूटनीति का रास्ता है, और फिर इस बात पर विचार करने के लिए कि हम उस रास्ते पर कैसे आगे बढ़ेंगे। फिर से बता दूं, कि आज इस बात पर सहमति बनी कि हम रूस द्वारा व्यक्त चिंताओं पर अपनी प्रतिक्रियाएं, और अपनी ख़ुद की चिंताएं साझा करेंगे और विचार के लिए कुछ प्रस्ताव आगे रखेंगे। और फिर रूस को उस दस्तावेज़ को देखने का अवसर मिलने के बाद हम फिर से मिलने की योजना बना रहे हैं, और तब हम देखेंगे कि हम वहां से किधर जाते हैं।

लेकिन मुझे ये भी स्पष्ट कर देना चाहिए: रूस इस समय कूटनीति में एक हद तक शामिल है, लेकिन साथ ही वह लगातार तनाव बढ़ाने वाली कार्रवाइयां जारी रख रहा है, यूक्रेन की सीमाओं पर अपनी सेना का जमावड़ा बनाए रख रहा है, और यूक्रेन के खिलाफ़ आक्रामक कार्रवाई की योजना पर काम कर रहा है। हम और हमारे सभी सहयोगी एवं साझेदार भी यह सुनिश्चित करने के लिए समान रूप से प्रतिबद्ध हैं कि हम रूस को ये स्पष्ट करने का हरसंभव प्रयास करें, जैसा कि मैंने कहा, कि रूस द्वारा यूक्रेन के खिलाफ़ किसी भी प्रकार की आक्रामकता का त्वरित, गंभीर और एकजुट जवाब दिया जाएगा। .

अंत में, मैं यह कहना चाहता हूं: देखिए एंद्रिया, आज की बातचीत के आधार पर, मेरा मानना है कि ऐसे मुद्दे हैं जहां पारस्परिकता के आधार पर, हम एक-दूसरे की कुछ चिंताओं को दूर कर सकते हैं। इनमें हमारी सैन्य गतिविधियों में अधिक पारदर्शिता, जोखिम घटाने के विभिन्न उपाय, हथियार नियंत्रण, और विश्वास का माहौल बनाने के अन्य तरीकों को शामिल किया जा सकता है जिससे मुझे लगता है कि रूस द्वारा व्यक्त कुछ चिंताओं के साथ-साथ हमारी कई चिंताएं भी दूर हो सकेंगी।

लेकिन उन चीजों के बारे में समान रूप से स्पष्टता होना बहुत ही महत्वपूर्ण है जोकि हम नहीं कर सकते, और उनमें से एक यह है कि हम अपने उन मूलभूत सिद्धांतों से पीछे नहीं हटेंगे कि जिनकी रक्षा के लिए हम हमेशा प्रतिबद्ध रहे हैं। और उनमें से एक है नैटो का खुला दरवाज़ा, और अन्य बातों में शामिल हैं, जैसा कि मैंने हाल के दिनों और हाल के हफ़्तों में बात की है, इस सिद्धांत के प्रति हमारी प्रतिबद्धता कि कोई राष्ट्र बलपूर्वक दूसरे देश की सीमा का उल्लंघन और उसमें बदलाव नहीं कर सकता है, कि वह किसी अन्य देश पर अपनी पसंद, अपनी नीतियां, जिसके साथ वह संबद्ध हो, को थोपने की कोशिश नहीं कर सकता है, और वह अपना ऐसा प्रभाव क्षेत्र लागू नहीं कर सकता है जोकि उसके पड़ोसियों को उसकी इच्छा के अधीन कर दे। हम इनमें से किसी भी सिद्धांत पर बात नहीं करने जा रहे हैं, और मुझे लगता है कि रूस इसे बहुत अच्छी तरह समझता है।

तो फिर से कहना चाहूंगा, कि हमारे बीच पिछले सप्ताह और आज यहां जेनेवा में हुई व्यापक बातचीत के आधार पर, मुझे लगता है कि सुरक्षा के बारे में कुछ पारस्परिक चिंताओं को दूर करने हेतु हमारे पास आधार और साधन हैं। हम देखेंगे कि ऐसा होता है कि नहीं। और इस बीच, हम रूस के बारे में हमारे द्वारा व्यक्त दोनों रास्तों पर दृढ़तापूर्वक तैयारी जारी रखेंगे: कूटनीति और संवाद का मार्ग, या फिर नए सिरे से आक्रमण, टकराव और उसके परिणामों का मार्ग।

श्री प्राइस:  माइकल क्रॉली।

प्रश्न:  और आपका —

श्री प्राइस:  माफ़ कीजिए, एंद्रिया। हमारे पास सीमित समय है। माइकल क्रॉली।

प्रश्न:  और आपका — ईरान के बारे में सवाल, श्री —

विदेश मंत्री ब्लिंकन:  ओह, माफ़ करें, मैं – (अश्रव्य) इस बारे में बात करने के लिए। तो, ईरान के संबंध में, मैं कहना चाहूंगा कि रूस हमारी तात्कालिकता की भावना साझा करता है, यह देखने वाली बात होगी कि क्या हम आगामी हफ़्तों में फिर से समझौते का पारस्परिक अनुपालन शुरू करते हैं कि नहीं। और हम आशा करते हैं कि रूस अपने प्रभाव और ईरान के साथ अपने संबंधों का उपयोग ईरान को तात्कालिकता की भावना पर सहमत करने के लिए करेगा। साथ ही, ईरान के आवश्यक दायित्वों के पालन से इनकार करने पर हम उसके दोबारा आरंभ परमाणु कार्यक्रम से पैदा ख़तरे से निपटने के लिए अलग रास्ता अपनाएंगे। यह एक ऐसा कार्यक्रम है जिसे विगत में जेसीपीओए समझौते द्वारा रोक दिया गया था, और समझौते से हमारे बाहर निकलने पर दुर्भाग्य से अब इस पर से रोक हट गई है और ईरान ने अपना ख़तरनाक कार्यक्रम दोबारा शुरू कर दिया है।

श्री प्राइस:  माइकल।

प्रश्न:  धन्यवाद, विदेश मंत्री ब्लिंकन। अमेरिकी और रूसी राजनयिकों के बीच चार अनिर्णायक बैठकों के बाद, क्या सफलता पाने के लिए इस प्रक्रिया को राष्ट्रपति के स्तर तक ले जाने की आवश्यकता है? क्या वास्तव में यहां प्रगति सुनिश्चित करने के लिए राष्ट्रपति बाइडेन को राष्ट्रपति पुतिन से बात करने की आवश्यकता है?

और, यदि मैं एक और सवाल पूछ सकता हूं तो: बर्लिन में, आपने सुरक्षा सहित इस संकट से जुड़े दांवों – सीमाओं की अनुलंघ्घनीयता तथा अंतरराष्ट्रीय शांति और सुरक्षा के शासी सिद्धांत – को रेखांकित किया। लेकिन राष्ट्रपति बाइडेन ने कुछ सप्ताह पहले कहा था कि इस स्थिति में अमेरिकी सैन्य बल के उपयोग का विकल्प विचारणीय नहीं है। हालांकि मुझे यक़ीन है कि विभिन्न कारणों से अनेक अमेरिकी इसे सहजता से स्वीकार करते हैं, लेकिन क्या आप बिल्कुल स्पष्ट कर सकते हैं कि इसे विकल्पों से क्यों हटा दिया गया है। और क्या आप मानते हैं कि रूस के यूक्रेन पर आक्रमण करने की स्थिति में भी राष्ट्रपति का बयान लागू होगा? धन्यवाद।

विदेश मंत्री ब्लिंकन:  पहले, प्रश्न के दूसरे भाग को लेते हैं, हमने स्पष्ट कर दिया है और यूक्रेन के समर्थन और बचाव में कई क़दम उठाए हैं जो जारी रहेंगे। सबसे पहले और सबसे महत्वपूर्ण, हमने यूक्रेन के खिलाफ़ नए सिरे से आक्रमण की स्थिति में हमारे जवाब को ठोस रूप देने और उसे रूस के समक्ष स्पष्ट करने के लिए सहयोगियों और साझेदारों के साथ निकट समन्वय में काम किया है। और यह रूस को उस राह पर चलने से रोकने और

हतोत्साहित करने के उपायों का एक महत्वपूर्ण घटक है।

साथ ही, हमने यूक्रेन को अहम रक्षात्मक सैन्य सहायता प्रदान करने के काम को आगे बढ़ाया है – वास्तव में, अकेले गत वर्ष, 2014 के बाद सर्वाधिक सहायता दी गई है। यह काम जारी है। सहयोगी और साझेदार देश भी ऐसा ही कर रहे हैं। और अंत में, यूक्रेन के खिलाफ़ रूसी आक्रमण की स्थिति में नैटो को पूर्वी हिस्से में सुदृढ़ करने की योजना शुरू करने के लिए हमने सहयोगियों और साझेदारों के साथ निकट समन्वय में काम किया है। ये सब रूस को उसकी संभावित कार्रवाइयों की क़ीमत और परिणाम स्पष्ट करने के लिए किया जा रहा है।

हमें लगता है कि यह रूस को यूक्रेन के खिलाफ़ आगे और आक्रामण से बचने के लिए सहमत करने का सबसे अच्छा और प्रभावी तरीका है। यूक्रेन अमेरिका और यूरोप के अन्य देशों का भी एक अहम साझेदार है, लेकिन अनुच्छेद 5 के तहत हमारी प्रतिबद्धता नैटो सहयोगियों पर ही लागू होती है, जिसके लिए हम बेहद प्रतिबद्ध हैं। यूक्रेन नैटो का सदस्य नहीं है और यह अनुच्छेद 5 की प्रतिबद्धता के दायरे में नहीं आता है, लेकिन हम उसकी रक्षा करने और उस पर लक्षित आक्रामकता को रोकने या टालने के लिए सब कुछ करने के लिए दृढ़प्रतिज्ञ हैं। और जैसा कि मैंने कहा, हम आने वाले दिनों और आने वाले हफ़्तों में इन सारे प्रयासों को जारी रखेंगे, भले ही हम संभावित कूटनीतिक समाधान के मार्ग पर भी विचार कर रहे हैं।

और माफ़ करें, प्रश्न का पहला भाग क्या था?

प्रश्न:  प्रक्रिया को और तेज़ करने के लिए राष्ट्रपतियों के बीच वार्ता (अश्रव्य)।

विदेश मंत्री ब्लिंकन:  अच्छा, हां, धन्यवाद। आज हम जिस बात पर सहमत हुए हैं, वह ये कि हम अगले सप्ताह अपने विचारों को, रूस द्वारा उठाई गई चिंताओं पर हमारी प्रतिक्रिया को, हमारी चिंताओं को – हम इन्हें लिखित रूप में रूस के साथ साझा करेंगे। हम आज की बातचीत के आधार पर, उस लिखित दस्तावेज़ के आधार पर, साथ ही साथ रूस से प्राप्त दस्तावेज़ के आधार पर, आगे अनुवर्ती बातचीत करने का इरादा रखते हैं – शुरू में, कम से कम विदेश मंत्रियों के स्तर पर। और यदि दोनों राष्ट्रपतियों की मुलाक़ात, बातचीत, विचार-विमर्श इस प्रक्रिया को आगे बढ़ाने हेतु लाभदायक और उपयोगी साबित होती है, तो मुझे लगता है कि हम ऐसा करने के लिए पूरी तरह से तैयार हैं। राष्ट्रपति बाइडेन ने यहां जेनेवा में राष्ट्रपति पुतिन से मुलाक़ात की थी। उन्होंने कई मौक़ों पर फ़ोन पर या वीडियोकांफ्रेंसिंग के जरिए उनसे बात की है। और यदि हमें और रूसियों को ये लगता है कि उनके बीच एक और वार्ता मुद्दों को हल करने का सबसे अच्छा तरीका है, तो हम निश्चित रूप से ऐसा करने के लिए तैयार हैं।

श्री प्राइस:  बेन हॉल।

प्रश्न:  विदेश मंत्री जी, धन्यवाद। मैं सोच रहा था कि आप जहां आगे और बातचीत के लिए, रूसियों के साथ और बातचीत के लिए यहां आते रहेंगे, वे अपनी कार्रवाई जारी रख रहे हैं। वे बड़े पैमाने पर सैनिकों का जमावड़ा करते जा रहे हैं; वे यूक्रेन को अस्थिर करना जारी रख रहे हैं। आर्थिक रूप से, यूक्रेन कई कठिनाइयों का सामना कर रहा है। क्या आप उस नुक़सान की बात स्वीकार करते हैं जो वे पहले ही अपने आक्रामक कार्यों के माध्यम से कर चुके हैं, और बदले में, आप इसी समय प्रतिबंधों पर विचार क्यों नहीं करते? प्रतिबंधों के लिए अमेरिका में दोनों दलों का समर्थन प्राप्त है; यूक्रेन ने उनकी मांग भी की है। ऐसा क्यों नहीं करते?

और मेरा दूसरा प्रश्न: आपने बार-बार कहा कि रूस अपनी आक्रामकता के लिए जो बहाना देता है वह झूठा है, वास्तव में वो आधारहीन है। मैं ये जानने के लिए उत्सुक हूं कि क्या विदेश मंत्री लावरोव आपके सामने बैठकर, आपकी आंखों में झांकते हुए आपके सामने झूठ बोलते हैं। और यदि ऐसा है, तो उन्हें सीधा जवाब देने में कैसी कोताही? यदि ऐसा है, तो उन्हें खुश रखने के लिए अगले सप्ताह लिखित प्रतिक्रिया क्यों दी जाए?

विदेश मंत्री ब्लिंकन:  धन्यवाद, बेन। सबसे पहले ये बता दूं कि हम रूस का सामना करने के लिए कार्रवाई करने का इंतज़ार नहीं कर रहे हैं। जैसा कि मैंने एक क्षण पहले कहा था, हमने पिछले एक साल में यूक्रेन को अधिकतम सुरक्षा सहायता दी है – मुझे लगता है कि 650 मिलियन डॉलर के आसपास – यह 2014 में जब रूस ने यूक्रेन पर आक्रमण किया था, उसके बाद किसी भी साल की तुलना में अधिक सहायता है। हम ये सहायता देना जारी रख रहे हैं। हम आने वाले हफ़्तों में अतिरिक्त खेप भेज रहे हैं।

जैसा कि मैंने बताया, हम दुनिया भर में व्यापक कूटनीति में लगे हुए हैं, यूक्रेन के खिलाफ़ रूसी आक्रमण की स्थिति के लिए अपने सहयोगियों और साझेदारों को एकजुट कर रहे हैं। कल, हमने रूसी प्रभाव फैलाने के लिए यूक्रेन में सक्रिय और देश को अस्थिर करने में लगे लोगों के खिलाफ़ कार्रवाई की घोषणा की। और फिर, जैसा कि मैंने कहा है, हमने रूस को दोटूक बता दिया है कि अगर वे यूक्रेन पर फिर से आक्रमण करते हैं तो उन्हें अपनी अर्थव्यवस्था के लिए त्वरित और गंभीर क़ीमत का सामना करना पड़ेगा, साथ ही हम पूर्वी हिस्से में नैटो को सुदृढ़ करेंगे।

हम कूटनीति और वार्ताओं में जुटे हुए हैं; यह मेरा काम है। लेकिन साथ ही, हम रक्षा और निरोधक प्रयासों के मार्ग पर भी चल रहे हैं। ये चीजें परस्पर असंगत नहीं हैं – वास्तव में, ये एक दूसरे को सुदृढ़ करती हैं। इसलिए जब हम परस्पर बातचीत कर रहे हैं, अगर रूस लगातार तनाव बढ़ा रहा है और सैन्य जमावड़ा बढ़ा रहा है, तो हम भी यूक्रेन को उसकी रक्षा के लिए दी जाने वाली सहायता को बढ़ा रहे हैं, नैटो गठबंधन को आवश्यकतानुसार और मज़बूत कर रहे हैं, तथा रूस पर थोपी जाने वाली भारी क़ीमत को परिभाषित और परिष्कृत कर रहे हैं और इस सिलसिले में वित्तीय, आर्थिक और अन्य प्रतिबंधों पर अपने सहयोगियों और साझेदारों के साथ समन्वय कर हैं।

तो हम एक ही समय दोनों काम कर रहे हैं। अब, जब हमारे बीच बातचीत का विषय आता है, तो मुझे लगता है कि इसका व्यापक अर्थ ये हो सकता है कि कभी-कभी हम और रूस इतिहास की अलग-अलग व्याख्याएं करते हैं। और मुझे कहना होगा कि आज हमने निश्चित रूप से ऐसी बातें सुनीं जिन पर हम उनके इतिहास के संदर्भ में दृढ़ता से असहमत थे, लेकिन कुल मिलाकर, बातचीत बहसपूर्ण नहीं थी। यह बेबाक और औपचारिक थी, और मुझे लगता है कि इस अर्थ में यह उपयोगी थी। और इस संभावना को टटोलना अहम है कि हम इन मतभेदों को कूटनीति और बातचीत के माध्यम से दोबारा हल कर सकते हैं कि नहीं। निश्चय ही यह समाधान का बेहतर तरीक़ा है, स्पष्टतया यह ज़िम्मेदारीपूर्ण तरीक़ा है, लेकिन यह रूस पर भी निर्भर करता है।

श्री प्राइस:  अब हम अंतिम सवाल लेते हैं लोरां बर्खाल्टर का।

प्रश्न:  धन्यवाद, विदेश मंत्री जी। लोरां बर्खाल्टर, स्विस टेलीविज़न आरटीएस से। मैं उन उपायों के बारे में बात करना चाहता था जो तनाव घटाने के लिए अपनाए जा सकते हैं – आपने उनका उल्लेख किया है – दोनों पक्षों की तरफ़ से। यदि आप उन्हें फिर बता सकें और हमें समयसीमा का कुछ अनुमान दे सकें, कि ये कितनी जल्दी होने चाहिए, और सबसे पहले क्या हो। और बड़ी तस्वीर पर भी प्रकाश डालें, आपके हिसाब से क्रेमलिन मौजूदा स्थिति से क्या चाहता है?

विदेश मंत्री ब्लिंकन:  ऐसा है, कि आखिरी सवाल शायद राष्ट्रपति पुतिन को संबोधित करना सबसे अच्छा रहेगा क्योंकि, एक मायने में, केवल वही असलियत जानते हैं। मैं थोड़ी देर में उस मुद्दे पर वापस आऊंगा। जैसा कि मैं पहले कह रहा था, रूस द्वारा पेश प्रस्तावों को देखकर, उनकी बातों को सुनकर, अपने सहयोगियों और साझेदारों के साथ गहन परामर्श करके, और रूस द्वारा की जाने वाली कार्रवाइयों के संदर्भ में अपनी गहरी सुरक्षा चिंताओं – न केवल यूक्रेन के संबंध में, बल्कि अन्य स्थानों पर और यूरोप और उसके बाहर अन्य तरीकों से – पर विचार कर मैं समझता हूं ये कहना उचित होगा कि हमारे सामने ऐसे मुद्दे हैं जिनको लेकर हम यह देखने के लिए बातचीत और कूटनीति को आगे बढ़ा सकते हैं कि क्या हम अपनी सुरक्षा चिंताओं को पारस्परिकता के आधार पर दूर करने के तरीक़े खोज सकते हैं जोकि हमारे लिए, हमारे यूरोपीय सहयोगियों और साझेदारों के लिए और रूस के लिए सुरक्षा बढ़ा सकें।

साथ ही, जैसा कि मैंने पहले कहा था, पारदर्शिता, भरोसा बढ़ाने के उपाय, सैन्य अभ्यास, हथियार नियंत्रण समझौते – वास्तव में ये सब हम अतीत में कर चुके हैं और अगर गंभीरता से इन पर विचार किया जाए तो मैं समझता हूं तनाव कम हो सकेगा और कुछ चिंताओं को दूर किया जा सकेगा। लेकिन ये देखने वाली बात होगी कि क्या हम सार्थक तरीक़े से ऐसा कर सकते हैं। और मुझे लगता है, यह इस बात पर निर्भर करता है कि रूस वास्तव में क्या चाहता है। असल सवाल ये है।

और एक बात मुझे हैरान कर रही है, जिसे मैंने आज विदेश मंत्री लावरोव के साथ साझा किया। मैंने उनसे, रूस के दृष्टिकोण से, मुझे यह समझाने की कोशिश करने के लिए कहा कि कैसे वे रूसी कार्रवाइयों को उसके घोषित सुरक्षा हितों और व्यापक सामरिक हितों को आगे बढ़ाने वाला मानते हैं। क्योंकि जैसा कि मैंने विदेश मंत्री लावरोव से कहा, हाल के वर्षों में आपने जो कुछ भी किया है, उनसे लगभग हर वो मुद्दे गंभीर हुए हैं जिनसे आप बचने की इच्छा जताते हैं।

2014 में, यूक्रेन पर रूस के आक्रमण और क्रीमिया पर उसके क़ब्ज़े और डोनबास में उसके अतिक्रमण, से पहले यूक्रेन में रूस की स्वीकार्यता की रेटिंग 70 प्रतिशत थी। अब ये 25 या 30 प्रतिशत रह गई है। 2014 में क्रीमिया पर रूसी आक्रमण और क़ब्ज़े तथा डोनबास में अतिक्रमण से पहले, नैटो की सदस्यता के लिए यूक्रेन में समर्थन 25 या 30 प्रतिशत था। अब यह 60 प्रतिशत है। 2014 से पहले, हम शीतयुद्ध की समाप्ति के बाद से यूरोप में अपने बलों को मज़बूत करने के साथ ही उनमें कटौती की राह पर थे। लेकिन 2014 के बाद ये हुआ कि नैटो ने रूसी आक्रमण के कारण अपने पूर्वी हिस्से को मज़बूत करने के दायित्व को महसूस किया। और 2014 के बाद से, सहयोगियों और साझेदारों को रक्षा खर्च बढ़ाने के लिए सहमत करने का वर्षों का हमारा प्रयास सफल रहा है, लेकिन मुझे कहना होगा कि इसकी सबसे बड़ी वजह रूस और उसकी कार्रवाइयां रही हैं।

तो रूस के घोषित सामरिक हितों और चिंताओं के मद्देनज़र ये कैसे हुआ – उनके कार्यों ने उन चिंताओं को कैसे बढ़ाया है? इसके विपरीत, रूसी कार्रवाइयां उसके घोषित इरादे की उलट दिशा में गई हैं। और अब, यदि रूस यूक्रेन के खिलाफ़ फिर से आक्रमण करता है, तो इसके परिणामस्वरूप केवल वे बातें ही सुदृढ़ होंगी, जिन प्रवृत्तियों को लेकर रूस चिंता जताता है। इसलिए मुझे उम्मीद है कि श्री लावरोव और राष्ट्रपति पुतिन आने वाले दिनों और सप्ताहों पर नज़र डालते हुए इस बात पर विचार करेंगे। धन्यवाद।

श्री प्राइस:  धन्यवाद, विदेश मंत्री जी।


मूल स्रोत: https://www.state.gov/secretary-antony-j-blinken-at-a-press-availability-12/.

अस्वीकरण: यह अनुवाद शिष्टाचार के रूप में प्रदान किया गया है और केवल मूल अंग्रेज़ी स्रोत को ही आधिकारिक माना जाना चाहिए।

U.S. Department of State

The Lessons of 1989: Freedom and Our Future