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अमेरिकी विदेश विभाग
प्रवक्ता का कार्यालय
अप्रैल 29, 2021
ब्रीफ़र: नेड प्राइस, प्रवक्ता
प्रमुख अंश

श्री प्राइस: नमस्कार। आपके सवाल लेने से पहले मैं कुछ बातें सामने रखना चाहूंगा।

सबसे पहले, कोविड-19 मामलों की नई लहर से जूझ रहे भारत के साथ अमेरिका की एकजुटता की बात। अमेरिका भारत में अपने साझेदारों को तत्काल राहत के तौर पर आने वाले दिनों में 100 मिलियन डॉलर से अधिक की सामग्री पहुंचा रहा है।

इसके अलावा, अमेरिका की राज्य सरकारों, निजी कंपनियों, ग़ैरसरकारी संगठनों, और देश भर में हज़ारों अमेरिकियों ने भारत के अग्रिम पंक्ति के स्वास्थ्यकर्मियों और मौजूदा प्रकोप में सर्वाधिक प्रभावित लोगों के समर्थन में भारतीय अस्पतालों के लिए अहम ऑक्सीजन, संबंधित उपकरण और आवश्यक सामग्री जुटाने का काम किया है।

अमेरिका सरकार की उड़ानें आज रात से भारत पहुंचने लगेंगी और यह क्रम अगले सप्ताह तक जारी रहेगा।

जिस तरह महामारी के शुरुआती दौर में, जब हमारे अस्पतालों पर भारी दबाव था, भारत ने अमेरिका को सहायता भेजी थी, अमेरिका ज़रूरत के समय भारत की सहायता करने के लिए प्रतिबद्ध है।

[…]

सवाल:  इस सहायता के अलावा, आप लोगों ने आज यात्रा संबंधी नया नोटिस, यात्रा चेतावनी जारी किया है, जिसमें दूतावास और चार वाणिज्य दूतावासों के अमेरिकी सरकारी कर्मियों के परिवारों के लिए अधिकृत प्रस्थान का उल्लेख किया गया है। मुझे बस उत्सुकता हो रही है जानने की। क्या इसकी बहुत लोगों द्वारा मांग की गई थी? क्या वहां लोग – और मुझे पता है कि आप संख्या आदि की बात नहीं करना चाहते, लेकिन क्या लोग रवाना होना चाहते थे और क्या लोग इस अधिकृत प्रस्थान के तहत पहले ही रवाना हो चुके हैं?

श्री प्राइस:  सवाल के लिए धन्यवाद। और मुझे लगता है कि एक पल के लिए इस बारे में बोलना महत्वपूर्ण है कि यह क्या था और उससे भी महत्वपूर्ण बात यह कि यह क्या नहीं था। अत्यधिक एहतियात के तौर पर, विदेश विभाग ने नई दिल्ली स्थित अमेरिकी दूतावास और देश भर में वाणिज्य दूतावासों के कर्मचारियों के परिजनों के स्वैच्छिक प्रस्थान, तथाकथित अधिकृत प्रस्थान, की स्वीकृति दी। अधिकृत प्रस्थान किसी को भारत छोड़ने के लिए मजबूर नहीं करता है; इसमें किसी के लिए भी रवाना होना आवश्यक नहीं है। यह इन परिजनों को एक विकल्प देता है कि यदि वे चाहें तो प्रस्थान कर सकते हैं। प्रस्थान, फिर से बता दूं, कि आवश्यक नहीं है।

मुझे लगता है कि इस बारे कुछ ग़लत रिपोर्टिंग भी हुई है, शायद एक ग़लत धारणा है, कि हमने भारत में प्राइवेट अमेरिकी नागरिकों के लिए कोई संशोधित दिशानिर्देश जारी किया है। ये सच नहीं है। नियमानुसार यात्रा परामर्श दोबारा जारी किए गए हैं, लेवल फ़ोर ट्रैवल एडवाइजरी जो पहले भी प्रभाव में थी, केवल भारत में ही नहीं बल्कि कोविड की स्थिति को देखते हुए विश्व स्तर पर।

[…]

सवाल: भारत से ही जुड़ी बात है। मैं जानना चाह रहा था कि यह अमेरिकी दूतावास के भीतर या अमेरिकी दूतावास के कर्मचारियों के बीच प्रकोप से कैसे संबंधित है। क्या आपके पास इस बात का कोई अपडेट है कि वहां के कर्मचारियों में कितने लोग संक्रमित हैं और कितनी मौतें हुई हैं, और मिशन में कर्मचारियों की सुरक्षा के लिए दूतावास और सरकार क्या कर सके हैं?

श्री प्राइस:  हम पिछले दिनों इसकी चर्चा कर चुके हैं, और मैट से मैं कहूंगा, कि हमारे लिए सार्वजनिक रूप से संख्या बताना मुश्किल है, प्राइवेसी संबंधी एहतियात के कारण। हम इतना निश्चित रूप से कह सकते हैं, कि हमारी हमदर्दी भारत के लोगों के साथ है जो संक्रमण की इस लहर का सामना कर रहे हैं। यह कहना उचित है कि कोविड ने भारतीय समाज के हरेक पहलू को प्रभावित किया है और, निश्चित रूप से, जैसा कि आप उम्मीद कर सकते हैं, भारत के साथ हमारी वैश्विक व्यापक साझेदारी को देखते हुए भारत में हमारी एक बड़ी राजनयिक उपस्थिति है। इसलिए मैं अमेरिकी दूतावास के कर्मचारियों या परिजनों या स्थानीय स्तर पर कार्यरत कर्मचारियों के बारे में कोई विवरण नहीं दे सकता, लेकिन स्पष्ट रूप से यह एक महामारी है; यह एक प्रकोप है, भारत में संक्रमण के मामलों में आया एक उछाल है जिससे देश का कोई भी हिस्सा अछूता नहीं है।

सवाल:  और क्या यह प्रकोप टीके के बावजूद हुआ है? स्पष्ट है कि आप विभिन्न दूतावासों को टीके भेज रहे हैं। क्या भारत में दूतावास को टीके मिलने में देरी हो रही थी जो कि शायद इसकी वजह बनी हो?

श्री प्राइस:  जैसा कि हमने उल्लेख किया है कि मेरा मानना है कि अप्रैल के मध्य तक, दुनिया भर में हमारे मिशनों को, उनमें से सभी को टीका सुलभ था। यह एक ऐसा प्रयास था जिसे यथासंभव तेज़ी से पूरा किया गया। वैक्सीन भारत में हमारे कर्मचारियों के लिए, भारत में दूतावास के कर्मचारियों के लिए कई सप्ताहों से उपलब्ध है। लेकिन स्पष्ट रूप से, किसी भी वैश्विक वितरण प्रयास के समान ही, यह एक जटिल उपक्रम है, लेकिन इसे हमने जितनी जल्दी संभव हो सकता था उतनी जल्दी किया और हमें इस पर गर्व है। जैसा कि हमने पिछले दिनों कहा था, उस व्यापक प्रयास में टीके की एक भी खुराक बेकार नहीं गई – भारत में हमारे मिशन सहित दुनिया भर में लगभग 200,000 खुराकें भेजी गईं।

शॉन।

सवाल:  निश्चित रूप से भारत से संबंधित प्रश्न, भारत में जो एक बात हुई है, कि मोदी सरकार के प्रदर्शन के कई आलोचकों, जैसे विपक्षी राजनीतिज्ञ, भारत सरकार के अनुरोध से, उनके पोस्ट को कम से कम आंतरिक रूप से भारत में ट्विटर और अन्य सोशल मीडिया मंचों से हटा दिया गया। क्या इस बारे में अमेरिका ने सोचा है? क्या आपको लगता है कि ऐसा करना भारत सरकार के अधिकार क्षेत्र में है? क्या आपको इस बारे में कुछ कहना है?

श्री प्राइस:  ऐसा है कि हमने भारत को लेकर और दुनिया भर के देशों के बारे में कहा है कि अभिव्यक्ति की स्वतंत्रता, सूचना की स्वतंत्रता किसी भी लोकतंत्र की पहचान होती है। बेशक, भारत एक बड़ा लोकतंत्र है, जिसके साथ हम बुनियादी मूल्य साझा करते हैं, और सूचना की स्वतंत्रता, अभिव्यक्ति की स्वतंत्रता ऐसा विषय है जिसका कि हम दुनिया भर में समर्थन करते हैं।

जी।

सवाल:  क्या हम भारत के बारे में पूछ सकते हैं?

श्री प्राइस:  ज़रूर, हम ललित का सवाल लेंगे और फिर काइली।

सवाल:  हां। मेरा आपकी टिप्पणी से ही जुड़ा सवाल है कि जब अभिव्यक्ति की स्वतंत्रता के माध्यम या सोशल मीडिया को सरकार के खिलाफ हिंसा भड़काने के लिए एक साधन के रूप में उपयोग किया जाता है या क़ानून व्यवस्था को बिगाड़ने के लिए? तो सरकार उस स्थिति को कैसे संभालती है?

श्री प्राइस:  कैसे – सरकार कैसे संभालती है – मैं समझ नहीं पाया?

सवाल:  हां। जब साधन का इस्तेमाल – सोशल मीडिया का इस्तेमाल हिंसा भड़काने के साधन के तौर पर किया जाता है –

श्री प्राइस:  अच्छा।

सवाल:  – जैसा कि समाज के कुछ वर्ग वहां कर रहे हैं।

श्री प्राइस: बेशक। निश्चय ही, नफ़रत की बातें फैलाना और हिंसा के लिए उकसाना, ये ऐसी बातें हैं जिनका हम हर जगह विरोध करते हैं। लेकिन स्पष्ट रूप से, हम अभिव्यक्ति की स्वतंत्रता का समर्थन करते हैं, साथ ही हिंसा के लिए उकसाने या नफ़रत फैलाने वाली बातों की हम निंदा करते हैं।

सवाल:  भारत को आप जो सहायता प्रदान कर रहे हैं, उसके लिए धन्यवाद। लेकिन मैं ये पूछना चाहूंगा कि इस समय भारत में महामारी की स्थिति के बारे में अमेरिका का आकलन क्या है? कितनी गंभीर स्थिति है? क्या यह दुनिया में कहीं भी कोविड-19 का सबसे बुरा प्रकोप है?

श्री प्राइस:  मैं इस तरह की व्यापक राय देने से बचना चाहूंगा। मुझे लगता है कि आप किसी भी मानक पर देख सकते हैं, और निश्चित रूप से, यदि आप संक्रमण की संख्या को देखते हैं, संक्रमण की दैनिक संख्या, निश्चित रूप से, आप इतनी संख्या में संक्रमण देख रहे हैं जोकि निश्चय ही चिंताजनक है, और महामारी को हर मापदंड पर आप अत्यंत चिंताजनक मान सकते हैं। और इसीलिए अमेरिकी सरकार जुटी हुई है, भारत सरकार का समर्थन करने में पूरी तरह जुटी हुई है। जैसा कि मैंने पिछले दिनों कहा था, इस प्रकोप के शुरू होने के बाद से, हाल ही में घोषित सहायता से पहले, अमेरिका ने भारत की सार्वजनिक स्वास्थ्य प्रणाली के समर्थन में 19 मिलियन डॉलर की सहायता दी थी।

बेशक, हमने हाल के दिनों में बहुत अधिक घोषणाएं की हैं, न केवल अमेरिकी सरकार की तरफ़ से, बल्कि विदेश विभाग से, यूएसएड से, सीडीसी से, लेकिन साथ ही, हमने निजी क्षेत्र को एकजुट करने का प्रयास किया है। जैसा कि आप जानते हैं कि विदेश मंत्री ब्लिंकन ने इस सप्ताह के शुरू में एक कॉल में हिस्सा लिया था और वास्तव में इस सप्ताह के प्रारंभ में एक बैठक का आयोजन किया था चैंबर ऑफ कॉमर्स के साथ। गेल स्मिथ ने भी उस बातचीत में भाग लिया था। उन्होंने चैंबर ऑफ कॉमर्स के साथ बाद की एक बैठक में भी भाग लिया और ज़ोर दिया कि अगर हमें भारत में मामलों में मौजूदा उछाल के खिलाफ़ प्रगति करनी है, तो ये ऐसी स्थिति नहीं है कि भारत सरकार अकेले इससे निपट सकती है, यह ऐसा कुछ ऐसा है कि जिससे अमेरिका की सरकार अकेले निपट सकती है। इसमें सभी की भूमिका है, निजी क्षेत्र की, ग़ैरसरकारी समुदाय की, सिविल सोसाइटी की, और हम यही करने का प्रयास कर रहे हैं। हम चाहते हैं – हम आशा करते हैं कि हमारी सहायता का समाज पर उत्प्रेरक प्रभाव पड़ेगा, व्यापक रूप से यहां और दुनिया भर में लोगों को भारतीयों की मदद के लिए आगे करने में।

सवाल: क्या अमेरिका सरकार और भारत सरकार के बीच कोई मतभेद है कि सहायता कैसे वितरित की जानी है? मैंने कहीं सुना है कि अमेरिका इस सहायता को एनजीओ के माध्यम से वितरित करना चाहता है और सीधे स्थानीय सरकारों को भेजना चाहता है। भारत सरकार इसे संघीय सरकार के माध्यम से वितरित करना चाहती थी।

श्री प्राइस:  हमारा लक्ष्य यह देखना है – और यह एक लक्ष्य है, निश्चित रूप से, जिसे हम भारत सरकार के साथ साझा करते हैं – कि इस सहायता का तत्काल और प्रभावी उपयोग हो। इसके विवरण के लिए, मैं उन लोगों से संपर्क की सलाह दूंगा जोकि इसे ज़मीन पर कार्यान्वित कर रहे हैं।

सवाल:  और आप इस प्रशासन के पहले 100 दिनों में भारत-अमेरिका संबंधों को किस रूप में देखते हैं?

श्री प्राइस:  निश्चित रूप से पिछले 100 दिनों में भारत पर सम्मिलित रूप से ध्यान केंद्रित किया गया है। राष्ट्रपति बाइडेन ने कल रात अपने संबोधन में भी भारत का उल्लेख किया था। और मुझे लगता है कि आप इस गहरी साझेदारी और साझेदारी की प्रतिबद्धता को विभिन्न नज़रिए से देख सकते हैं।

जैसा कि आप जानते हैं, राष्ट्रपति बाइडेन को ख़ुद पिछले दिनों प्रधानमंत्री मोदी से बात करने का अवसर मिला था। विदेश मंत्री ब्लिंकन ने अपने समकक्ष विदेश मंत्री जयशंकर के साथ भी कई बार बातचीत की है। कई उच्चस्तरीय प्रतिनिधिमंडल भेजे गए हैं। अधिक दिन नहीं हुए जब सेक्रेटरी केरी जलवायु पर चर्चा करने के लिए भारत में थे। रक्षा मंत्री ऑस्टिन हमारे सुरक्षा सहयोग के घटकों पर चर्चा करने के लिए अभी कुछ दिन पहले ही भारत में थे।

हमने भारत के साथ बहुपक्षीय स्तर पर भी सहभागिता की है, क्वाड के माध्यम से, दोनों ही स्तर पर – मंत्री स्तर पर और पहली बार नेता स्तर पर भी। मैंने हमारे बीच जलवायु पर सहयोग का उल्लेख किया है, लेकिन हमारे बीच स्वास्थ्य के क्षेत्र में भी सहयोग हो रहा है। और ये सब महामारी से पहले शुरू हो चुका था, लेकिन महामारी की शुरुआत के साथ इसमें तेज़ी आई और मामले बढ़ने पर, हम हाल के दिनों में भारत में मामलों में चिंताजनक उछाल की बात कर रहे हैं, इसमें और तेज़ी आई है।

इसलिए मैं समझता हूं मौजूदा सहयोग हमारी वैश्विक समग्र साझेदारी को परिलक्षित करता है।

सवाल:  आपका बहुत शुक्रिया।

श्री प्राइस:  आपका शुक्रिया। काइली, भारत।

सवाल:  मैं आज सुबह केवल यात्रा परामर्श के बारे में पूछना चाहती हूं। इसमें अमेरिका के राजनयिकों के बारे में जो बातें हैं, उसके अलावा इसमें भारत में उन अमेरिकी नागरिकों से भी कहा गया है, जो भारत से निकलना चाहते हैं, कि वे उपलब्ध वाणिज्यिक यात्रा विकल्पों का लाभ उठाएं, और अन्य अमेरिकियों को वहां जाने के खिलाफ़ आगाह किया गया है।

तो क्या प्रशासन आने वाले दिनों या हफ़्तों में भारत से अमेरिका जाने वाली सभी उड़ानों पर रोक लगाने पर विचार कर रहा है?

श्री प्राइस:  यात्रा परामर्श के बारे में आपको पता ही है; मुझे लगता है कि हमने हाल ही में एक ब्रीफ़िंग में इस पर चर्चा की थी – लेकिन जैसा कि आप जानते हैं, विदेश विभाग ने हाल ही में यात्रा परामर्श जारी करने हेतु सीडीसी फ्रेमवर्क को अपनाया है। और इसलिए कई देश – मेरा मानना है कि दुनिया भर के 80 प्रतिशत देश – अब लेवल 4 यात्रा परामर्श के तहत हैं। यह विदेश विभाग द्वारा सीडीसी द्वारा उपयोग किए जाने वाले एकरूप प्रक्रिया को अपनाने का परिणाम है।

इसलिए जहां तक भारत में मौजूद अमेरिकियों के मार्गदर्शन की बात आती है, तो यह नहीं बदला है। बदलाव सिर्फ ये आया है कि अमेरिकियों के परिजन स्वैच्छिक आधार पर भारत से निकलने का विकल्प चुन सकते हैं। मैं समझता हूं कि कॉमर्शियल यात्राएं जारी है, भारत में कॉमर्शियल उड़ानें वहां से रवाना हो रही हैं और वहां पहुंच रही हैं। जब किसी भी यात्रा प्रतिबंध की बात आती है, जैसा कि आप जानते हैं, यह एक ऐसी चीज़ है जो क़रीबी समन्वय तथा सीडीसी और एचएचएस में जनस्वास्थ्य पेशेवरों की सलाह के आधार पर निर्धारित की जाती है।

सवाल:  लेकिन अगर उन उड़ानों को बंद करने पर विचार किया जा रहा होता, तो यह स्पष्ट रूप से विदेश विभाग के ऊपर होता कि वह अमेरिकियों को अग्रिम सूचना देता कि ऐसी संभावना है। यह देखते हुए कि आप लोगों ने ऐसी चेतावनियां जारी नहीं की हैं, क्या हमें यह मान लेना चाहिए कि इन उड़ानों को बंद किए जाने की अभी कोई आशंका नहीं है?

श्री प्राइस:  एक बार फिर, यह मेरा विषय नहीं है। मैं इससे अधिक कुछ भी नहीं कह पाऊंगा – आपने आज जो अपडेटेड ट्रैवल एडवाइज़री देखी उसमें आप ख़ुद सूचनाएं ढूंढ सकते हैं। फिर से, मेरा मानना यही है कि कॉमर्शियल उड़ानों का वहां से रवाना होना और वहां उतरना जारी है। प्रवेश की अर्हताओं या प्रतिबंधों संबंधी कोई भी बदलाव जनस्वास्थ्य से प्रेरित तथा चिकित्सा पेशेवरों और सीडीसी के समन्वय में निर्धारित होगा।

सवाल:  और विदेश विभाग अमेरिकियों को इसकी अग्रिम जानकारी देगा?

श्री प्राइस:  विदेश विभाग दुनिया भर में अमेरिकियों से हमारे दूतावासों के ज़रिए नियमित संवाद करता है।

सवाल:  जब आप सीडीसी मानकों को अपनाने की बात करते हैं, तो मैं ये सुनिश्चित करना चाहती हूं कि ये सिर्फ स्वास्थ्य और बीमारियों को लेकर है?

श्री प्राइस:  सही कहा। ये सही है।

सवाल:  क्योंकि सीडीसी इस मामले में अच्छा है, लेकिन वे राजनीतिक परिणामों के बारे में शायद अधिक नहीं जानते हैं।

श्री प्राइस:  हां, और दुनिया के क़रीब 80 प्रतिशत देश मौजूदा लेवल 4 पर जनस्वास्थ्य चिंताओं के कारण ही हैं।

सवाल:  बीमारी के कारणों से।

श्री प्राइस:  बिल्कुल सही।

सवाल:  लेकिन आप अभी भी अपने ख़ुद के मानकों को आधार बना रहे हैं – हिंसा की वजह, या –

श्री प्राइस:  बेशक। निश्चय ही। हां।

सवाल:  भारत के बारे में एक अनुवर्ती सवाल। क्या आपको पता है कि सीडीसी कब दिल्ली स्थित अमेरिकी दूतावास में अपने अधिकारियों की टीम भेज रहा है?

श्री प्राइस:  मैं कहूंगा, कि जितना जल्दी संभव हो सकता हो। व्हाइट हाउस के फ़ैक्टशीट में सीडीसी टीम का उल्लेख है, जैसाकि आपको पता है। मैं समझता हूं वे जितना जल्दी संभव हो अपनी भागीदारी करेंगे, पर विशेष विवरणों के लिए मैं आपको सीडीसी से संपर्क करने की सलाह दूंगा।

जी।

सवाल:  धन्यवाद।

सवाल:  धन्यवाद, श्रीमान। मेरा नाम नज़ीरा अज़ीम करीमी है। मैं एक अफ़ग़ान स्वतंत्र पत्रकार हूं। जैसा कि आप जानते हैं अफ़ग़ानिस्तान के लिए ये संवेदनशील समय है। अफ़ग़ान महिलाएं बेहद चिंतित हैं, हालांकि उनकी ढेर सारी उपलब्धियां हैं। मैं कुछेक उदाहरण लेकर आई हूं। और निश्चय ही मानसिक रूप से वे बुरे हाल में हैं। क्या आप हमें कुछ विवरण देंगे, संक्षिप्त सूचना कि भविष्य में उनकी स्थिति क्या होगी? वे अपने भविष्य को लेकर वास्तव में चिंतित हैं।

और साथ ही, तालिबान ने शांति प्रक्रिया के तहत इस्तांबुल सम्मेलन को स्थगित कर दिया, और ऐसा लगता है कि तालिबान अब अधिक ताक़तवर है। इस्तांबुल सम्मेलन होगा कि नहीं?

श्री प्राइस:  जहां तक इस्तांबुल सम्मेलन की बात है, तो हमने आयोजकों से सुना है कि रमज़ान के महीने के दौरान इसका आयोजन होने की संभावना नहीं है, लेकिन इस बारे में अपडेट के लिए मैं आपको आयोजकों से संपर्क करने की सलाह दूंगा।

जब महिलाओं और बालिकाओं की बात आती है – और उन विवरणों के लिए धन्यवाद – जैसा कि आप जानते हैं, विदेश मंत्री ब्लिंकन ने राष्ट्रपति बाइडेन के व्हाइट हाउस में भाषण के तुरंत बाद, कुछ घंटों के भीतर अफ़ग़ानिस्तान की यात्रा की। और बेशक, हम वहां राष्ट्रपति ग़नी से मिले, हम चेयरमैन अब्दुल्ला से मिले, लेकिन महत्वपूर्ण बात यह है कि हमने सिविल सोसायटी के प्रतिनिधियों से भी मुलाक़ात की। और उस बैठक में आधा दर्जन या कुछ अधिक प्रतिभागी थे, और एक को छोड़कर सभी महिलाएं थीं, वो महिलाएं जो अफ़ग़ान लोगों की कड़ी मेहनत से हासिल प्रगति – अफ़ग़ान लोगों ने पिछले 20 वर्षों में जो कुछ हासिल किया है – से लाभांवित होने वालों में सबसे आगे रही हैं।

और विदेश मंत्री ब्लिंकन ने स्पष्ट किया है कि यह उनके लिए विशेष रूप से महत्वपूर्ण था – न केवल अफ़ग़ानिस्तान जाना, बल्कि सिविल सोसायटी के प्रतिनिधियों और अफ़ग़ान महिलाओं से मिलना, यह संकेत भेजने के लिए कि हम अफ़ग़ानिस्तान से भले ही सैन्य वापसी कर रहे हों, लेकिन अफ़ग़ानिस्तान के लोगों के साथ हमारी साझेदारी स्थायी है। हमने स्पष्ट किया है कि कोई भी देश जो अंतरराष्ट्रीय वैधता चाहता है, जो अलग-थलग किया जाना नहीं चाहता हो, उसे महिलाओं और बालिकाओं का सम्मान करना होगा, और यह बात अफ़ग़ानिस्तान की भावी सरकार पर भी लागू होती है। अमेरिका विदेश विभाग और यूएसएड के ज़रिए उन अहम कार्यक्रमों को सहयोग देना जारी रखेगा जिनमें से कइयों ने पिछले 20 वर्षों में अफ़ग़ानिस्तान की महिलाओं और बालिकाओं द्वारा कड़ी मेहनत से हासिल उपलब्धियों का समर्थन किया है।

जैसा कि आप जानते हैं, अफ़ग़ानिस्तान में जमीन पर हमारी राजनयिक उपस्थिति जारी रहेगी। अफ़ग़ानिस्तान के लोगों के साथ उस स्थायी साझेदारी के एक घटक के रूप में यह विशेष रूप से महत्वपूर्ण है।

सवाल:  क्या इसी बारे में आगे सवाल पूछ सकता हूं?

श्री प्राइस:  हां।

सवाल:  धन्यवाद।

सवाल:  क्या मैं पूछ सकता हूं?

श्री प्राइस:  हां। माफ़ करें, मैं आपको देख नहीं पाया था। हां।

सवाल:  हां, माफ़ करें। आज एक ख़बर थी कि अमेरिकी सैनिक वापसी शुरू कर रहे हैं। क्या आप दूतावास की स्थिति का ब्यौरा देंगे। क्या वहां से वापसी शुरू हो चुकी है?

श्री प्राइस:  सैनिकों की वापसी के बारे में आपको रक्षा विभाग से बात  करने की आवश्यकता होगी, लेकिन व्यापक विचार यह है कि – और राष्ट्रपति बाइडेन ने ये बात अपने भाषण में भी कही है – कि केवल उतनी सैन्य उपस्थिति ही अफ़ग़ानिस्तान में रहेगी, हमारे दूतावास की रक्षा के लिए आवश्यक अत्यंत सीमित उपस्थिति, और यह उस कारण से अहम है जिसकी मैं अभी चर्चा कर रहा था। भले ही हम अफ़ग़ानिस्तान में 20 साल की सैन्य भागीदारी से पीछे हट रहे हैं, ज़मीन पर हमारे दूतावास के माध्यम से, हमारे राजनयिकों समेत हमारे असैनिक प्रतिनिधियों के माध्यम से, हमारी मौजूदगी बनी रहेगी।

जैसा कि आप जानते हैं, इस सप्ताह की शुरुआत में एक घोषणा हुई थी कि हम काबुल से अपने कुछ कर्मचारियों को स्थानांतरित करेंगे। ये ऐसे कर्मचारी हैं जो अपना काम कहीं और कर सकते हैं। यह कार्मिकों की पुनर्तैनाती है जो हमें उन्हें कहीं और नियुक्ति देने का मौक़ा देगा और इससे अतिरिक्त कर्मियों को लाने में भी मदद मिलेगी जो सैनिक वापसी और हमारे दूतावास पर पड़ने वाले प्रभावों के प्रबंधन में हमारी मदद करेंगे और ऐसे कार्मिक जो सरकार और आगे प्रगति करते अफ़ग़ानिस्तान के लोगों के बीच कूटनीतिक संपर्क का काम करेंगे। जैसा कि हमने उल्लेख किया है, वापसी के इस आदेश का काबुल में हमारे दूतावास में तैनात अपेक्षाकृत बहुत कम राजनयिकों पर असर पड़ेगा।

हां।


मूल स्रोत: https://www.state.gov/briefings/department-press-briefing-april-29-2021/

अस्वीकरण: यह अनुवाद शिष्टाचार के रूप में प्रदान किया गया है और केवल मूल अंग्रेज़ी स्रोत को ही आधिकारिक माना जाना चाहिए।

U.S. Department of State

The Lessons of 1989: Freedom and Our Future